शहद (हनी) और डायबिटीज: डायबिटीज से बचाव का उपाय – Shehed (Honey) Aur Diabetes: Diabetes Se Bachav Ka Upay

शहद और डायबिटीज

शहद (हनी) और डायबिटीज – Shehed (Honey) Aur Diabetes

शहद और डायबिटीज का संबंध वर्षों पुराना है। यही कारण है कि डायबिटीज वाले लोग शहद का इस्तेमाल भोजन और औषधि दोनों के तौर पर करते हैं। डायबिटीज और तपेदिक आदि कई बीमारियों के लिए इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं। यह चीनी के मुकाबले में बहुत ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक है, जिसकी सबसे बड़ी वजह इसमें मौजूद कैलोरी की कम मात्रा है। चीनी के बजाय शहद का इस्तेमाल करना डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। मधुमक्खियों द्वारा इकट्ठा किये फूलों के पराग से बनने वाला शहद एक अन्य प्रकार की चीनी है। 

प्राकृतिक मिठास वाला शहद पानी और फ्रुक्टोज-ग्लूकोज नाम की दो शर्करा के मिश्रण से बनता है। अध्ययन बताते हैं कि ग्लूकोज में 30 से 35 प्रतिशत और  फ्रुक्टोज में लगभग 40 प्रतिशत चीनी होती है। इसमें विटामिन, खनिज और अन्य एंटीऑक्सीडेंट की एक छोटी मात्रा यानी लगभग 0.5 प्रतिशत शामिल होती है, जो शहद को पौष्टिक बनाता है। इसके अलावा शहद में लगभग 17 ग्राम कार्ब्स और प्रति चम्मच 60 कैलोरी होती है, जिसकी वजह से इसे हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद माना जाता है।

पारंपरिक सफेद चीनी को अक्सर सुक्रोज के तौर पर जाना जाता है, जिसमें 50 प्रतिशत ग्लूकोज और 50 प्रतिशत फ्रुक्टोज मौजूद होता है। लगभग एक चम्मच सफेद चीनी में 13 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिनमें कोई विटामिन या खनिज नहीं होता है। इससे पता चलता है कि सफेद चीनी की तुलना में शहद आपके लिए ज़्यादा फायदेमंद है। हालांकि, डायबिटीज के मरीज को हर खाद्य पदार्थ की तरह शहद पर भी हमेशा नियंत्रण रखना चाहिए और एक निश्चित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए।

शहद के प्रकार – Shehed Ke Prakar

शहद के प्रकार

शहद मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं, जो फलों के पराग से मिलने वाले शहद से अलग होते हैं। यह शहद के स्वाद और उसके रंग दोनों को प्रभावित करते हैं।

कच्चा शहद

अनफिल्टर्ड शहद कच्चे शहद का दूसरा नाम है। यह शहद एक छत्ते से आता है और विषाक्त पदार्थों को हटाने के इसे लिए फिल्टर किया जाता है। कच्चे शहद का इस्तेमाल सदियों से लोगों के उपचार किया जाता था, जिसके स्वास्थ्य और चिकित्सा फायदों की एक विस्तृत श्रृंखला भी है। कुछ अस्पतालों द्वारा इसे घाव को ठीक करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। कच्चा शहद कई एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत माना जाता है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। इस तरह के शहद का इस्तेमाल करने से लोगों को पाचन से जुड़ी समस्याओं और घावों को भरने में भी मदद मिल सकती है।

प्रसंस्कृत शहद

प्रोसेस्ड या प्रसंस्कृत शहद को पतला बनाने के लिए ज़्यादा पाश्चुराइज्ड किया जाता है। इस तरह के शहद को कई बार छाना और आकार दिया जाता है, जिससे शहद को एक पारदर्शी और प्रस्तुत करने वाली संरचना मिलती है। इस प्रक्रिया में हीटींग, फिल्ट्रेशन, अल्ट्रासोनिकेशन, क्रीमिंग, माइक्रोवेव और गामा रेडिएशन शामिल हैं, जिससे शहद की सभी गंदगी को खत्म करने में भी मदद मिलती है। कच्चे शहद की तुलना में प्रोसेस्ड शहद किसी व्यक्ति की सेहत के लिए कम फायदेमंद होता है। हालांकि, ज़्यादातर लोग घर में इस्तेमाल करने के लिए प्रोसेस्ड शहद को खरीदना ज़्यादा पसंद करते हैं।

शहद और दूसरी मिठास में अंतर – Shehed Aur Dusri Mithas Mein Antar

शहद में चीनी से कम जीआई होता है, इसलिए चीनी के बजाय आप शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरी मिठास की तुलना में शहद का सेवन करना आपके लिए ज़्यादा फायदेमंद है, जैसे:

  1. कम जीआई मूल्य की वजह से शहद रक्त शर्करा का स्तर नहीं बढ़ाता है, इसीलिए यह दूसरी मिठास से बेहतर है।
  2. चीनी से ज़्यादा मीठा होने के कारण शहद का सेवन सीमित होना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों के लिए शहद चीनी की जगह फायदेमंद विकल्प है।
  3. इंसुलिन का स्तर मैनेज कर रहे लोगों को शहद कई फायदे दे सकता है, जबकि दूसरी मिठास के इस्तेमाल से ऐसा कोई फायदा नहीं होता है।

इसके अलावा आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शहद और दूसरी मिठास का ज़्यादा सेवन गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। शहद में दूसरी मिठास से ज़्यादा पोषक तत्व होते हैं, इसलिए यह डायबिटीज वाले मरीजों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले शहद और चीनी स्वाद के साथ-साथ बनावट में भी बहुत अलग होते हैं।

कई लोग सुबह नाश्ते के दौरान टोस्ट पर गुड़ के स्वाद और बेकिंग में ब्राउन शुगर की नमी से ज़्यादा शहद को पसंद करते हैं। आपको यह देखना चाहिए कि आप इसका कितना इस्तेमाल करते हैं। साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है। इसके अलावा शहद के कई अन्य फायदे हैं, लेकिन ज़्यादा मात्रा में सेवन करने पर शहद और चीनी दोनों ही आपके स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर आप डायबिटीज या दिल की बीमारी के मरीज हैं और अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको अपनी आहार संबंधी ज़रूरतों के बारे में अपने डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए। वह बेहतर आदर्श आहार रणनीति के लिए आपकी ज़्यादा मदद कर सकते हैं।

शहद के फायदे – Shehed Ke Fayde

डायबिटीज में शहद के फायदे

एक अध्ययन में यह पाया गया है कि टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों द्वारा एक सीमित मात्रा में शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि शहद में किसी व्यक्ति के इंसुलिन लेवल को बढ़ाने की क्षमता होती है। यह रक्त शर्करा के स्तर (ब्लड शुगर लेवल) को नियंत्रित करने में भी आपकी मदद करता है। शहद एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर स्रोत है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं। इसकी इन्हीं खासियतों की वजह से आप चीनी के बजाय शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पोषक मान

 

शहद एक फायदेमंद विक्लप है, जिसमें विटामिन, खनिज और कुछ अन्य एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्व होते हैं, लेकिन कोई फाइबर, वसा या प्रोटीन नहीं होता है। आपकी सेहत के लिए हर तरह से फायदेमंद इस विकल्प में ऊर्जा और पानी ज़्यादा होता है। इसलिए, डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए इसमें चीनी के मुकाबले कम जोखिम कारक होते हैं। आपको बता दें कि एंटीऑक्सिडेंट युक्त खाद्य पदार्थों में शहद होता है, जो आपके शरीर को इसे प्रभावी ढंग से पचाने में मदद करता है। इसके अलावा शहद में एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होते हैं, जो आपकी डायबिटीज की जटिलताएं दूर करने में भी मदद करते हैं।

सेहद के लिए फायदेमंद

डायबिटीज में शहद के फायदे

कई एंटीऑक्सिडेंट वाले शहद में आपके रक्तचाप को कम करने की क्षमता होती है। साथ ही यह आपके कोलेस्ट्रॉल के लेवल को सुधारने में मदद करता है। इसका सेवन करने वाले लोगों के ट्राइग्लिसराइड्स लेवल में सुधार होता है और दिल से जुड़ी अन्य बीमारियों के जोखिम में कमी आती है। यह चक्कर आना, थकान, तपेदिक, आंखों की बीमारी, अल्सर और घावों के उपचार जैसी समस्याओं को ठीक करता है। यही नहीं, शहद के सेवन से आप मेटाबॉलिज़्म से संबंधित बीमारियों का जोखिम भी कम कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं की मानें, तो शहद सूजन संबंधी प्रक्रियाओं से लड़ने में मदद करता है। सूजन से जुड़ी यह प्रक्रियाएं आमतौर पर डायबिटीज, एथेरोस्क्लेरोसिस और दिल की बीमारियों की वजह से होती हैं। यह सभी बीमारी मेटाबॉलिक सिंड्रोम की खासियत हैं, लेकिन डायबिटीज की दवाओं को शहद के साथ मिलाने से भी आपको कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी फायदे मिल सकते हैं।

शहद का उपयोग करने के तरीके – Shehed Ka Upyog Karne Ke Tareeke

वर्षों से इस्तेमाल किये जा रहे इस बेहतरीन उपाय को आहार में एडेड शुगर माना जाता है, फिर भले ही यह प्राकृतिक हो। हालांकि, अगर इसका सेवन कम या उचित मात्रा में किया जाए, तो यह डायबिटीज से पीड़ित मरीजों द्वारा इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। इसी तरह आप फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं, जो रक्त शर्करा प्रबंधन में आपकी मदद करते हैं। इन खाद्य विकल्पों में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, नट्स, बीज और फलियां शामिल हैं। शहद वाले किसी भी भोजन या नाश्ते को दूसरे स्वस्थ और कम कार्बोहाइड्रेट वाले विकल्पों के साथ संतुलित करने के सलाह दी जाती है। नीचे दिए कुछ तरीकों की मदद से आप शहद का सुरक्षित तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें शामिल हैंः

दही के साथ शहद का सेवन

अगर आप अपने रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रण में रखना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सुबह सबसे पहले दही के साथ शुद्ध शहद का सेवन करना चाहिए। आमतौर पर डॉक्टर इसे एक महीने तक रोज़ाना दोहराने का सुझाव देते हैं। इससे आपके रक्त शर्करा स्तर में धीरे-धीरे गिरावट होती है।

शहद और दालचीनी

यह डायबिटीज के इलाज का थ्री-इन-वन कॉम्बिनेशन है, जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है। इसके अलावा वजन घटाने में मदद करने वाला यह नुस्खा आपकी रक्त शर्करा के स्तर को मैनेज करने में भी मदद करता है।

शहद, अदरक और नींबू की चाय

नींबू के रस, शहद और अदरक से बनी चाय में एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इससे आपको पचाने और इम्यून को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। पोटेशियम की उच्च मात्रा वाला नींबू विटामिन सी से भरपूर है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और बीमा पैदा करने वाले मुक्त कणों को शरीर से निकालने में मदद करता है।

डायबिटीज में शहद के प्रभाव – Diabetes Mein Shehed Ke Prabhav

डायबिटीज में शहद के प्रभाव

आपको अक्सर शहद या किसी अन्य स्वीटनर के प्रभाव को ध्यान से देखने का सुझाव दिया जाता है। लेख के अगले भाग में आप डायबिटीज के दो प्रमुख कारकों यानी इंसुलिन और रक्त शर्करा पर शहद के प्रभाव को जानेंगे।

शहद और इंसुलिन

इंसुलिन अग्न्याशय द्वारा बननेन वाला एक हार्मोन है, जिससे आपको रक्त शर्करा के रेगुलेशन में मदद मिलती है। जब किसी व्यक्ति के शरीर में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ना शुरू होता है, तो अग्न्याशय को इंसुलिन छोड़ने का संकेत मिलता है। तब यह कोशिकाओं को अनलॉक करने का काम करता है। इस तरह ग्लूकोज को रक्तप्रवाह से कोशिकाओं के अंदर प्रवाहित होने में मदद मिलती है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए ईंधन के तौर पर किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की वजह से व्यक्ति के रक्त शर्करा स्तर में कम आती है।

इसके अलावा शहद पहले ही कुछ अध्ययनों में दूसरी शर्करा के मुकाबले में एक मजबूत इंसुलिन प्रतिक्रिया देने के लिए सिद्ध हो चुका है। इसके अलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं कि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए शहद का सेवन करना फायदेमंद विकल्प है और इससे डायबिटीज को रोकने या इसका उपचार करने में मदद मिल सकती है। डायबिटीज या टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों का शरीर इंसुलिन का उत्पादन करने में असमर्थ होता है। कई बार इस स्थिति में उनका शरीर सही तरीके से इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। इसी वजह से इससे पीड़ित लोगों के शरीर में पर्याप्त इंसुलिन नहीं होता है। ऐसे में शरीर द्वारा इंसुलिन का उचित इस्तेमाल नहीं किया जाता है, जिससे ग्लूकोज उनके रक्तप्रवाह में मौजूद रहता है। यही कारण किसी व्यक्ति में उच्च रक्त शर्करा स्तर या हाइपरग्लाइसीमिया की समस्या पैदा करता है।

शहद और रक्त शर्करा

यह स्वाद, रंग और फायदों में सफेद चीनी से बिल्कुल अलग है। शहद की तरह चीनी में बहुत सारे विटामिन और खनिज नहीं होते हैं। इसीलिये, डायबिटीज वाले लोगों को शहद से फायदे की संभावना नहीं है। यह आपके रक्त शर्करा को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। शहद में चीनी के मुकाबले कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी होता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स मापता है कि कार्बोहाइड्रेट कितनी जल्दी आपके शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाने का काम करते हैं। इस घरेलू उपचार का जीआई मान 58 है, जबकि चीनी का जीआई मान 60 होता है। इसका मतलब है कि सभी कार्बोहाइड्रेट की तरह शहद भी आपकी रक्त शर्करा को जल्दी बढ़ाता है। हालांकि, यह तेजी चीनी की तुलना में कम होती है। इसके अलावा यह आपके रक्त शर्करा और सही मात्रा में इंसुलिन लेने की आपकी क्षमता को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

शहद को चीनी से बदलें – Shehed Ko Sugar Se Badlein 

सफेद चीनी, टर्बिनाडो चीनी, गन्ने से बनने वाली चीनी और पाउडर चीनी जैसी परिष्कृत शर्करा को बदलने के लिए शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, लोगों को शहद का एक सीमित मात्रा में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर ऐसा इसलिए किया जाता है,क्योंकि यह किसी व्यक्ति के शरीर में उच्च रक्त रक्त शर्करा स्तर का कारण भी बन सकता है। खासतौर से ऐसा तब होता है, जब इसे दूसरी चीनी के बदले इस्तेमाल किया जाता है। कुछ निर्माता शहद बनाते हैं, जो 100 प्रतिशत शुद्ध नहीं होता है और इसमें एडेड शुगर या सिरप हो सकते हैं।

आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि कच्चे शहद एक ज़हर का तरह हो सकते हैं, जो बच्चों में बोटुलिज़्म की समस्या की बड़ी वजह बन सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एक साल से कम उम्र वाले शिशुओं के लिए शहद हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा, शहद अन्य खाद्य पदार्थों, जैसे ताजे फल और सब्जियों को पोषक तत्व देता है, जो पोषक तत्वों के ज़्यादा स्रोत होते हैं। साथ ही यह ज़्यादा फाइबर देते हैं और पानी की कमी दूर करते हैं, जिससे आपको रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। डायबिटीज के मरीजों को किसी भी तरह के मीठे का सेवन बार-बार करना चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मिठास के लगातार इस्तेमाल से रक्त शर्करा के स्तरम में कम बढ़ोतरी होती है।

शहद के जोखिम – Shehed Ke Jokhim

शहद में कुछ ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, ज़्यादा फायदे के लिए आपको शहद की थोड़ी ज़्यादा मात्रा लेनी चाहिए, जिससे आपको ज़्यादा विटामिन और खनिज मिल सकते हैं। इन पोषक तत्वों के दूसरे स्रोतों का आपके शरीर में रक्त शर्करा के स्तर पर बहुत कम प्रभाव होता है। चीनी को बदलने के लिए आपको सिर्फ थोड़ी मात्रा में शहद के सेवन की ज़रूरत होती है। डायबिटीज वाले मरीजों को शहद के सेवन से कई तरह का खतरा रहता है और इन्ही में से कुछ जोखिम कारक निम्नलिखित हैं:

रक्त शर्करा पर प्रभाव

अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो इस पर नियंत्रण के लिए आपको शहद और दूसरी मिठास खाने से परहेज़ करना चाहिए। इससे आपका रक्त शर्करा का स्तर गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि आपको 
शहद की कम मात्रा लेनी चाहिए या इसे खाने से परहेज करना चाहिए। अगर आप इसे स्वीटनर के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में सोच रहे हैं, तो इसके लिए आपको पहले अपने स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को शहद के ज़्यादा सेवन से होने वाली बीमारियों का खतरा ज़्यादा होता है।

बच्चों में ज़हर (बेबी बॉटुलिज्म)

शहद के एक अन्य जोखिम कारक में 12 महीने से कम उम्र के शिशु शामिल हैं। यह बेबी बोटुलिज़्म के खतरे के कारण है। यह कच्चे और पाश्चुरीकृत शहद दोनों से संचारित हो सकता है। हालांकि, यह एक वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए सुरक्षित है। वयस्कों में आंत का बोटुलिज़्म अत्यंत दुर्लभ है। इसलिए शहद उनमें मधुमेह के कम लक्षण पैदा करता है।

शहद से डायबिटीज की रोकथाम – Shehed Se Diabetes Ki Roktham

डायबिटीज की रोकथाम कारक के तौर पर शहद का समर्थन करने वाला कोई अध्ययन अभी तक नहीं मिला है। हालांकि, तथ्यों के मुताबिक शहद इंसुलिन के स्तर को बढ़ाता है। साथ ही इससे डायबिटीज वाले मरीजों को भी अपना रक्त शर्करा नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उचित मात्रा में शहद का नियमित सेवन आपकी ग्लाइसेमिक इंडेक्स वैल्यू को कम करता है।

शहद और चीनी से संबंधित एक अध्ययन में चीनी के मुकाबले टाइप 1 डायबिटीज वाले 50 व्यक्तियों के सभी प्रतिभागियों पर शहद का ग्लाइसेमिक प्रभाव कम था। जबकि, बिना टाइप 1 डायबिटीज वाले 30 लोगों में इसका ग्लाइसेमिक प्रभाव कम देखा गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि जब शरीर में इंसुलिन का उत्पादन किया जाता है, तो रक्तप्रवाह में एक रसायन निकलता है, जो सी-पेप्टाइड को बढ़ाता है। एक सामान्य सी-पेप्टाइड का मतलब है कि आपके शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन किया जा रहा है।

निष्कर्ष – Nishkarsh

डायबिटीज की आहार योजना में चीनी के बजाय शहद का इस्तेमाल करने से आपको कई फायदे होते हैं। हालांकि, कई अध्ययन इसकी पुष्टि नहीं करते हैं, क्योंकि शहद में दानेदार चीनी से ज़्यादा अधिक कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। यही कारण है कि डॉक्टरों द्वारा आपको शहद का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करने का सुझाव दिया जाता है। शहद का सीमित सेवन डायबिटीज को रोक या इसका उपचार कर सकता है।

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