गर्भकालीन (प्रेगनेंसी/जेस्टेशनल) डायबिटीज: लक्षण, कारण और उपचार – Pregnancy (Gestational) Diabetes: Lakshan, Karan Aur Upchar

Pregnancy Diabetes: Causes, Symptoms and Treatment

गर्भकालीन (प्रेगनेंसी/जेस्टेशनल) डायबिटीज क्या है? Pregnancy (Gestational) Diabetes Kya Hai?

गर्भावस्था और डायबिटीज में कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद 2 से 10 प्रतिशत महिलाएं अपनी दूसरी तिमाही में गर्भकालीन डायबिटीज विकसित करती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था में डायबिटीज होने के कई कारण हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को उच्च रक्त शर्करा स्तर यानी हाइपरग्लाइसीमिया का अनुभव हो सकता है। रक्त शर्करा के स्तर में इस बढ़ोतरी को गर्भकालीन डायबिटीज मेलिटस (पीडीएम) या जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस (जीडीएम) कहा जाता है। टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की तरह गर्भाकालीन डायबिटीज शर्करा चयापचय यानी ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बाधित करता है। इसकी वजह से शरीर सही मात्रा में इंसुलिन सहित कार्ब्स को उचित तरीके से पचाने में असमर्थ होता है।

महिलाओं को 24 से 28वें हफ्ते के दौरान गर्भकालीन डायबिटीज होने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है। अगर समय रहते गर्भावस्था डायबिटीज पर ध्यान देकर इसकी पहचान की जाए, तो गर्भकालीन डायबिटीज के ज़्यादातर मामलों का निदान करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। आमतौर पर प्रसव पूर्व जांच में डॉक्टर पीड़ित महिला से पुरानी बीमारियों के पारिवारिक इतिहास की पूछताछ करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि कभी-कभी गर्भकालीन डायबिटीज के कारण प्रसव के कई जटिलताएं पैदा हो सकती है। इससे डॉक्टरों के पास सी-सेक्शन करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है।

गर्भकालीन डायबिटीज और डायबिटीज मेलिटस

अगर आपको पहले से ही गर्भकालीन डायबिटीज की समस्या है और इसका निदान किया गया है, तो आपको आगे जीवन में डायबिटीज मेलिटस या टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने की संभावना 60 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। गर्भावस्था का निदान एक मां यानी गर्भवती महिला में डायबिटीज की वजह बन सकता है। इससे मरीज में जल्द ही टाइप 2 डायबिटीज की शुरुआत हो सकती है, इसलिए उचित तरीके से सावधानियों का पालन किया जाना बहुत ज़रूरी है।

गर्भकालीन डायबिटीज के लक्षण – Pregnancy Diabetes Ke Lakshan

ज़्यादातर महिलाओं द्वारा गर्भकालीन डायबिटीज के लक्षणों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। यही कारण है, जो कई बार डायबिटीज के इस प्रकार का पता लगाना डॉक्टरों के लिए भी काफी मुश्किल काम होता है। ऐसी स्थिति में खुद महिलाएं गर्भकालीन डायबिटीज की मौजूदगी से अनजान होती हैं। कभी-कभी यह संकेत बहुत सामान्य और छोटे होते हैं, लेकिन बड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इन्हें अक्सर गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर दुष्प्रभाव माना जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार, गर्भकालीन डायबिटीज के लक्षणों पर कड़ी निगरानी रखना ज़रूरी है। निम्नलिखित लक्षण का अनुभव होने पर तुरंत डॉक्टर को रिपोर्ट करना सुनिश्चित करें:

  • आसानी से थकान महसूस होना
  • धुंधली दृष्टि की समस्या
  • ज़्यादा प्यास लगना
  • बार-बार या लगातार पेशाब आना
  • सोते समय खर्राटे लेना

अगर आपके द्वारा अनुभव किए जाने वाले लक्षण और संकेत छोटे हैं, तो इन्हें अनुपचारित छोड़ने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना आपके लिए हमेशा सबसे अच्छा विकल्प है। डॉक्टर स्थिति का बेहतर आंकलन कर सकते हैं, जिससे आपको प्रभावी उपचार करवाने में मदद  मिलती है। इसके अलावा वह आपको जीवनशैली में बदलाव का सुझाव भी दे सकते हैं।

गर्भकालीन डायबिटीज के कारण – Pregnancy Diabetes Ke Karan

किसी व्यक्ति को गर्भकालीन डायबिटीज की समस्या कई कारणों से हो सकती है। इसमें हार्मोनल बदलाव सहित अन्य कारक शामिल होते हैं, जो आपको सैकड़ों अन्य जटिलताओं के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाते हैं। लेख में आगे आप गर्भकालीन डायबिटीज के कारणों का पता लगा सकते हैं। आमतौर पर हार्मोनल बदलाव से शरीर में इंसुलिन की मात्रा असंतुलित होती है। इसे गर्भकालीन डायबिटीज के विकास की सबसे प्रमुख वजह माना बदल जाता है

इंसुलिन प्रतिरोध

कभी-कभी डायबिटीज वाले व्यक्ति की कोशिकाएं भी इंसुलिन का जवाब देना बंद कर देती हैं। इससे शर्करा के अवशोषण में रुकावट पैदा होती है और रक्त शर्करा का स्तर बढ़ सकता है। ज़्यादा लंबे समय तक रहने पर यह खासतौर से खतरनाक हो सकता है, जिसे इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है।

मानव प्लेसेंटल हार्मोन

शरीर में हार्मोन का एक बड़ा प्रवाह होता है, जिसकी वजह से बवासीर, पेट में जलन, थकान और नींद की कमी से लेकर कुछ मामलों में डायबिटीज तक सभी तरह के बदलाव होते हैं। हार्मोन के उच्च स्तरों में शामिल हैं:

  • मानव प्लेसेंटल लैक्टोजेन
  • एस्ट्रोजन
  • प्रोजेस्टेरोन
  • मानव प्लेसेंटल ग्रोथ हार्मोन

यह हार्मोन आपके शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को कम करते हैं, जिसके कारण शरीर में शर्करा जमा हो जाती है। जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है, इन हार्मोनों का स्तर भी धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। यह बढ़ी हुई एकाग्रता इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाने का काम करती है।

मानव प्लेसेंटल लैक्टोजेन (एचपीएल)

मानव गर्भधारण मेटाबॉलिज्म बदलावों का एक रोलर कोस्टर है। यह बदलाव गर्भवती महिला के शरीर पर दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं। उदाहरण के लिए, ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजेन सिन्सीटियोट्रोफोबलास्ट द्वारा बनाया जाता है। इस हार्मोन का स्राव मानव प्लेसेंटा के विकास के तरह ही होता है। एचपीएल मातृ विकास और भ्रूण विकास के लिए उतना ही ज़रूरी है, जितना कि ग्रोथ हार्मोन मानव वयस्कों के लिए है। आमतौर पर एचपीएल भ्रूण के उपभोग के लिए ज़्यादा ग्लूकोज आसानी से उपलब्ध कराने के लिए मां के शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाता है। यह देखा गया है कि गर्भावस्था के दौरान ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजेन का स्तर 30 गुना तक बढ़ जाता है और यह हार्मोन भ्रूण के विकास में प्रमुख भूमिका निभाता है।

गर्भकालीन डायबिटीज के जोखिम – Pregnancy Diabetes Ke Jokhim

कई कारक गर्भकालीन डायबिटीज में योगदान कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • निम्न रक्त शर्करा स्तर (हाइपोग्लाइसीमिया) या उच्च रक्त शर्करा स्तर (हाइपरग्लेसेमिया) का पारिवारिक इतिहास
  • डायबिटीज के प्रति आनुवंशिक प्रवृत्ति
  • गर्भावस्था के दौरान तेजी से वजन बढ़ना
  • मोटापा और ज़्यादा आंत की चर्बी
  • अतीत में गर्भपात
  • ग्लूकोकार्टिकोइड्स का सेवन
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)
  • जातीयता (मूल अमेरिकी, अफ्रीकी, एशियाई और हिस्पैनिक जैसे जातीय समूहों में गर्भकालीन डायबिटीज होने का खतरा ज़्यादा होता है)

गर्भकालीन डायबिटीज का निदान – Pregnancy Diabetes Ka Nidan

अगर आपका बीएमआई (बॉडी मांस इडेक्स) ज़्यादा है या आंतों में ज़्यादा वसा जमा है, तो आपको गर्भकालीन डायबिटीज होने की संभावना अपने आप बढ़ जाती है। इसके अलावा टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के पारिवारिक इतिहास वाली महिलाएं गर्भकालीन डायबिटीज के लिए भी अतिसंवेदनशील हो सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर प्रसव से पहले आपके शुरुआती विज़िट में इसका पता लगाने के लिए परीक्षण करते हैं। किसी भी तरह के लक्षण महसूस नहीं होने के बावजूद आपको अपने और बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति अहतियात बरतते हुए यह जांच करवानी चाहिए।

इन स्क्रीनिंग परीक्षणों में शामिल हैं:

ग्लूकोज चैलेंज टेस्ट

ग्लूकोज़ चैलेंज टेस्ट में डॉक्टर आपको ग्लूकोज़ का घोल पीने के लिए देते हैं। इसके एक घंटे बाद वह आपके ग्लूकोज़ के स्तर को मापते हैं। आमतौर पर 140 मिलीग्राम/डीएल तक रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य माना जाता है। हालांकि, अगर आपका रक्त शर्करा स्तर 190 मिलीग्राम/डीएल से ज़्यादा या इसके बराबर है, तो आपको गर्भकालीन डायबिटीज है।

अगर आपके शरीर में रक्त शर्करा का स्तर डॉक्टरों द्वारा सुझाई सीमा से ज़्यादा है, तो डॉक्टर आपको एक अन्य परीक्षण करने के लिए कह सकते हैं। दोबारा किए जाने इस परीक्षण के साथ आपको पहले से ज़्यादा गाढ़ा ग्लूकोज़ घोल दिया जाता है। इसके बाद डॉक्टर तीन घंटे हर घंटे तक आपके रक्त शर्करा स्तर की जांच करते हैं। अगर आपके परीक्षण ज़्यादातर समय के लिए रक्त शर्करा के स्तर में बढ़ोतरी दिखाते हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप गर्भकालीन डायबिटीज से पीड़ित हैं।

गर्भकालीन डायबिटीज का उपचार – Pregnancy Diabetes Ka Upchar

ज़्यादातर मरीजों में गर्भकालीन डायबिटीज के लक्षण बच्चे के जन्म के बाद गायब हो जाते हैं। जबकि, कुछ महिलाओं में यह लगातार प्रसव के बाद भी लगातार बने रहते हैं। गर्भकालीन डायबिटीज बच्चे के जन्म के बाद आपके टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित होने की संभावना भी बढ़ा सकता है। हालांकि, कुछ तरीके अपनाने से आपको रक्त शर्करा स्तर सुधारने में मदद मिल सकती है। इन तरीकों में शामिल हैं:

स्वस्थ आहार

 Healthy Diet

एक पौष्टिक आहार को हमेशा आपके लिए एक बेहतरीन उपाय माना जाता है। इससे आपको उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी किसी भी पुरानी बीमारी से बचने में मदद मिलती है। यह देखा गया है कि खराब पोषण से मोटापा बढ़ता है। यह कई अन्य पुरानी और जानलेवा विसंगतियों जैसे स्ट्रोक, दिल की बीमारी और गुर्दे में खराबी की मुख्य वजह है। इन्हीं कारणों से आपको अपने पोषण पर पूरा ध्यान देने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आपके पोषण में कमी अक्सर बच्चे के पोषण को प्रभावित करती है। जब आप एक स्वस्थ और पौष्टिक आहार का पालन करते हैं, तो इससे आपको मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही यह आपके स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है और आप ऊर्जावान के साथ ही खुश महसूस करने लगते हैं।

मौजूदा समय में पोषण हम सभी के लिए ज़रूरी है, लेकिन आपको पता होना ज़रूरी है कि पौष्टिक आहार में कौन सी सामग्री शामिल होनी चाहिए? एक पौष्टिक आहार में प्रोटीन, फाइबर और कम कार्ब्स जैसे मैक्रोन्यूट्रिएंट्स के सही संतुलन के साथ भोजन और पेय शामिल होना भी उतना ही ज़रूरी है। उनमें विटामिन और खनिज जैसे छोटे पोषक तत्व भी होने चाहिए। उच्च रक्त शर्करा के स्तर का सामना करना, पौष्टिक आहार बनाए रखना और एक ही समय में कैलोरी गिनना बहुत कठिन है। हालांकि, लंबा और स्वस्थ जीवन जीने के लिए बहुत ज़रूरी है।

बुनियादी कसरत

Basic Workout

 

अपने पहले प्रसवपूर्व के दौरान आपको डॉक्टर से पूछना चाहिए कि आपके लिए कौन से वर्कआउट उपयुक्त हैं और क्या आपको अपनी स्थिति के आधार पर वर्कआउट करना चाहिए या नहीं। मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए यह सलाह दी जाती है कि आप हर हफ्ते कम से कम 2.5 घंटे व्यायाम करें। नियमित व्यायाम से आपको बहुत सारे फायदे होते हैं, जो प्रसव के दौरान आपके जटिलताओं का जोखिम कम कर सकते हैं। यही कारण है कि कुछ डॉक्टर पीठ दर्द और ऐंठन कम करने के लिए व्यायाम का सुझाव भी देते हैं।

मां को स्वस्थ वजन पर रखते हुए व्यायाम गर्भकालीन डायबिटीज को काफी हद तक रोकने में मदद कर सकता है। यह ज़रूरी है कि गर्भावस्था के दौरान मां का कुछ वजन बढ़े। हालांकि, यह ध्यान रखना आपके लिए बहुत ज़रूरी है कि उनका वजन बहुत ज़्यादा न बढ़े। व्यायाम गर्भवती महिलाओं को प्रीक्लेम्पसिया के जोखिम से भी बचाता है। इसमें आमतौर पर उच्च रक्तचाप और लीवर या किडनी जैसे अन्य अंगों का संभावित नुकसान शामिल होता है। यह स्थिति अक्सर गर्भावस्था के 20वें हफ्ते में उत्पन्न होती है, जिसके लक्षणों में शामिल हैं:

  • वजन बढ़ना
  • उच्च रक्तचाप
  • कुछ मामलों में एडिमा

तनाव को कम करें

Relieve your stress

तनाव को डायबिटीज के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। यह सिर्फ इतना ही नहीं है कि तनाव गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है। बल्कि, समय से पहले प्रसव और कम वजन के बच्चे भी हो सकते हैं। यहां कुछ तरीके दिए गए हैं, जिनसे आप अपने तनाव को कम कर सकते हैं।

ध्यान लगाएं

यह एक कारण से लगभग 5,000 वर्षों से ज़्यादा समय से है। ध्यान कई लोगों के लिए अच्छा काम करता है, जिसके कई फायदे हैं। यह आपके तनाव, चिंता और पुराने दर्द को कम करने में मदद करता है। ध्यान को नींद, ऊर्जा के स्तर और मनोदशा में सुधार के लिए भी जाना जाता है। प्रभावी ध्यान सत्र के लिए आपको इन चरणों का पालन करना चाहिए:

  • एक शांत जगह ढूंढें।
  • आराम से बैठें या लेटें।
  • अपना ध्यान किसी शब्द, वाक्यांश वस्तु या यहां तक कि अपनी सांस पर केंद्रित करें।
  • अपने विचारों को आने और जाने दें।

योग

योग व्यायाम का एक रूप है, लेकिन इसमें ध्यान भी शामिल हो सकता है। योग कई प्रकार के होते हैं, लेकिन धीमी गति, खिंचाव और गहरी सांस लेने पर ध्यान केंद्रित करने वाले आपकी चिंता और तनाव को कम करने के लिए सबसे बेहतर है।

गहरी सांस लें

मानसिक तनाव आपके सहानुभूति तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जो संकेत देता है। गहरी सांस लेने के व्यायाम आपके पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करने में मदद कर सकते हैं, जो विश्राम प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है।

जब आप गहरी सांस लेने का अभ्यास करते हैं, तो आप अपने सिस्टम की आराम करने की प्राकृतिक क्षमता को चालू कर देते हैं। यह गहरे आराम की स्थिति बनाता है जो आपके शरीर द्वारा तनाव के प्रति प्रतिक्रिया करने के तरीके को बदल सकता है। यह आपके दिमाग को ज़्यादा ऑक्सीजन भेजता है और आपके तंत्रिका तंत्र के उस हिस्से को शांत करता है, जो आपकी आराम करने की क्षमता को संभालता है।

करीब से निगरानी

Close monitoring

डॉक्टरों के साथ नियमित अपॉइंटमेंट के लिए जाना बहुत ज़रूरी है। वह भ्रूण के विकास और बढ़वार की निगरानी करने के साथ ही बताते हैं कि आपका बढ़ा हुआ रक्त शर्करा का स्तर बच्चे को कैसे प्रभावित कर रहा है। गर्भकालीन डायबिटीज काफी आसानी से हाथ से निकल सकता है। अगर आप नियत तारीख पर या उसके आसपास प्रसव पीड़ा में नहीं जाती हैं, तो डॉक्टर आपको प्रसव पीड़ा के लिए प्रेरित कर सकते हैं। बच्चे के जन्म के बाद आपको नियमित रक्त शर्करा स्तर की जांच कराने की सलाह दी जाती है। भले ही गर्भकालीन डायबिटीज आमतौर पर प्रसव के बाद अपने आप दूर हो जाता है।

प्रसव की जटिलताएं – Prasav Ki Jatiltayein

गर्भावस्था और प्रसव प्रक्रिया के दौरान हर चीज हाइपरसेंसिटिव होती है। जबकि, गर्भकालीन डायबिटीज इसे ज़्यादा जटिल बनाता है और यही जटिलताएं आपके बच्चे को प्रभावित कर सकती है। जब आपका शरीर सभी शर्करा और ग्लूकोज को पचाने के लिए पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है, तो यह आपके बच्चे के पास जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यही आपके बच्चे को बढ़ने में मदद करती है।

हालांकि, गर्भकालीन डायबिटीज में आपके शरीर की अतिरिक्त शर्करा का यह संचय सीधे बच्चे में जाता है। इससे जन्म के समय बच्चे सामान्य से बड़े हो सकते हैं। इसकी अन्य जटिलताओं में शामिल हैं:

  • दमा
  • पीलिया और लीवर की समस्या
  • समय से पहले जन्म
  • निम्न रक्तचाप

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